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ट्रेडिंग कैसे शुरू करें: एक संपूर्ण गाइड

वित्तीय बाज़ार कमाई के असीमित अवसर देते हैं। ऑनलाइन ट्रेडरों की संख्या में तेज़ी से वृद्धि हुई, खासकर COVID-19 के दौरान। लोगों ने जाना कि ट्रेडिंग वास्तव में इतनी मुश्किल नहीं है। मोबाइल और वेब तकनीक की मदद से वे कई तरह के बाज़ारों में तुरंत ट्रेड कर सकते हैं।

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हालांकि, इससे सफलता की गारंटी नहीं मिलती। सभी ट्रेडर्स में से 90% से ज़्यादा असफल होते हैं। इसकी वजह यह है कि वे ट्रेडिंग शुरू करने और उसमें आगे बढ़ने के बुनियादी कदमों का पालन नहीं करते।

इस लेख में आप जानेंगे कि कुछ ही चरणों में न्यूनतम जोखिम के साथ वित्तीय बाज़ार में कैसे प्रवेश करें।

ट्रेडिंग शुरू करने के 5 चरण

ट्रेडिंग में छोटी-छोटी बातें भी मायने रखती हैं—भरोसेमंद प्लेटफ़ॉर्म चुनने से लेकर आज़माई हुई और सफल तकनीकें विकसित करने तक। आगे दिए गए कदम आपको वित्तीय बाज़ार में उतरने के लिए बेहतर तैयारी करने में मदद करेंगे।

चरण 1 – ट्रेडिंग रणनीति तय करें

सही शिक्षा आपको ट्रेडिंग की मज़बूत नींव बनाने में मदद करती है। ज़्यादातर नए ट्रेडर बाज़ार कैसे काम करते हैं, यह समझे बिना ही जल्दबाज़ी में अपना पहला ट्रेड खोल देते हैं। उपयोगकर्ताओं को ढेरों जानकारियाँ और लेख मिल सकते हैं, जो उन्हें अपनी शख्सियत और पसंद के अनुसार अलग-अलग ट्रेडिंग तरीकों और तकनीकों को जल्दी समझने में मदद करते हैं।

क्या आप स्कैल्पर के तौर पर ट्रेड करने की योजना बना रहे हैं? या स्टॉक्स जैसी कुछ अधिक पारंपरिक एसेट्स में लंबी अवधि की पोज़िशन लेना पसंद करेंगे? हर तरीके में कुछ जोखिम होते हैं, जिन्हें वास्तविक बाज़ार में ट्रेडिंग शुरू करने से पहले आपको समझना और ध्यान में रखना चाहिए।

चरण 2 – भरोसेमंद ब्रोकर चुनें

दूसरे चरण में यह तय करना है कि आप कहां ट्रेड करेंगे। इसके लिए आपको ऐसा प्लेटफ़ॉर्म चुनना होगा, जिसमें सभी ज़रूरी टूल उपलब्ध हों। यहां आपको इन बातों पर विचार करना चाहिए:

  • प्लेटफ़ॉर्म का वैध होना ज़रूरी है। इसके लिए आपके देश में ब्रोकरेज सेवाएं देने का आधिकारिक लाइसेंस और अनुमति होना आवश्यक है।
  • आपके चुने हुए ब्रोकर को कई तरह के ट्रेडिंग इंस्ट्रूमेंट और अच्छी ट्रेडिंग शर्तें (लीवरेज, पिप, टर्नओवर की शर्तें, बोनस आदि) उपलब्ध करानी चाहिए।
  • यूज़र्स के पास अप-टू-डेट ट्रेडिंग टर्मिनल या MT4 सॉफ़्टवेयर का ऐक्सेस होना चाहिए।
  • भरोसेमंद ब्रोकर अपने क्लाइंट्स को ताज़ा खबरों, रुझानों, एनालिटिक्स, टेक्निकल एनालिसिस आदि से जोड़े रखने के लिए नियमित वेबिनार और सेमिनार के साथ-साथ मज़बूत शैक्षिक सामग्री भी देते हैं।
  • आख़िर में, यह ज़रूर देख लें कि वेबसाइट पर डिपॉज़िट और विदड्रॉल के पर्याप्त तरीके उपलब्ध हों, ताकि आप तुरंत लेनदेन कर सकें।

चरण 3 – डेमो अकाउंट या पेपर ट्रेडिंग से अभ्यास करें

ट्रेनिंग से आप असली पैसे गंवाने का जोखिम उठाए बिना अपनी रणनीति को परख सकते हैं। ज़्यादातर नए ट्रेडर इस चरण को नज़रअंदाज़ कर देते हैं और सही बैकटेस्टिंग किए बिना ही किस्मत के भरोसे रहते हैं।

डेमो अकाउंट पर असली बाज़ार स्थितियों में बिना असली पैसे लगाए ट्रेड करने का अच्छा मौका मिलता है। पेपर ट्रेडिंग में भी ऐसा ही होता है, जहां यूज़र वर्चुअल पैसे से ट्रेड करते हैं। जब आप पूरी तरह तैयार हों और चुनी हुई रणनीति काम कर रही हो, तभी डिपॉज़िट करने का समय है।

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चरण 4 – एक योजना बनाएँ

जब हम “प्लान” कहते हैं, तो हमारा मतलब सिर्फ़ चुनी हुई निवेश रणनीतियों को लागू करने के कदमों से नहीं है। इसमें पैसे और जोखिम को सही ढंग से मैनेज करने के कदम भी शामिल हैं, ताकि आप एक ही बार में सब कुछ गंवाने से बच सकें। इसके नियम काफ़ी सरल हैं। अपनी क्षमता से ज़्यादा निवेश न करें। अनुभवी निवेशक अपने फंड का 10% से ज़्यादा इस्तेमाल नहीं करते।

चरण 5 – डिपॉज़िट करें और ट्रेडिंग शुरू करें

अब आप अपना पहला डिपॉज़िट करने के लिए तैयार हैं। सुनिश्चित करें कि आपका अकाउंट वेरिफ़ाई हो चुका है। ऐसा न होने पर, आप ब्रोकर की सभी सुविधाओं का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे, जिसमें पैसे निकालना भी शामिल है।

समझें कि ट्रेडिंग कैसे काम करती है

शुरुआती ट्रेडरों को यह बात साफ़ तौर पर समझनी चाहिए कि ट्रेडिंग कोई खेल या बिना सोचे-समझे दांव लगाने की गतिविधि नहीं है। बाज़ारों में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव हो सकता है, लेकिन ये उतार-चढ़ाव बेतरतीब नहीं होते। इनके पीछे खास घटनाएं, भू-राजनीतिक खबरें, वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति और ऐसे ही दूसरे कारण होते हैं।

सफलता की कुंजी संकेतकों और अंतर्निहित एसेट के आधार पर तकनीकी या फ़ंडामेंटल विश्लेषण का इस्तेमाल करके कीमतों का सटीक अनुमान लगाना है।

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MTrading शुरुआती और पेशेवर निवेशकों, दोनों के लिए उद्योग में अग्रणी ट्रेडिंग शर्तें उपलब्ध कराता है। ग्राहक विभिन्न बाज़ारों में 100 से अधिक इंस्ट्रूमेंट्स तक पहुँच सकते हैं। इनमें Forex, क्रिप्टो, स्टॉक्स, कमोडिटीज़ और अन्य शामिल हैं।

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ट्रेडर्स 30 से अधिक क्षेत्रीय पेमेंट प्रोसेसर के ज़रिए बिना कमीशन के डिपॉज़िट और विदड्रॉल, ज़ीरो पिप स्प्रेड, बेहतरीन MT4 ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म का ऐक्सेस और कई अन्य फ़ायदों का लाभ उठा सकते हैं। मिनटों में तेज़ और आसान रजिस्ट्रेशन पूरा करें, अपने अकाउंट को तुरंत वेरिफ़ाई करें और ऑनलाइन ट्रेडिंग की शानदार दुनिया को एक्सप्लोर करें!

ट्रेडिंग कैसे शुरू करें

शुरुआत से ट्रेडिंग शुरू करने के लिए आपको कुछ बुनियादी बातें जाननी होंगी। इनमें प्रमुख शब्द और ऐसी कार्रवाइयां शामिल हैं, जिन्हें एसेट के प्रकार की परवाह किए बिना चुनी गई रणनीति के अनुसार अपनाया जा सकता है।

लीवरेज और मार्जिन

लीवरेज उन ट्रेडर्स के लिए एक विकल्प है जो अपने बैलेंस में उपलब्ध नकद राशि की तुलना में बड़े पोज़िशन में ट्रेड करना चाहते हैं। आसान शब्दों में, कम फ़ंड से आप एसेट की बड़ी मात्रा में ट्रेड कर सकते हैं।

मार्जिन अकाउंट ट्रेडर की खरीद क्षमता बढ़ाते हैं। आम तौर पर, ब्रोकर द्वारा तय की गई मार्जिन आवश्यकताएँ जितनी अधिक होंगी, ग्राहकों को उतना ही कम लीवरेज रेशियो मिलेगा।

बढ़ती और गिरती कीमतों पर ट्रेड करें

वित्तीय बाज़ार तेज़ी से बदल रहे हैं। बाज़ार में उथल-पुथल के दौरान ट्रेडर्स के लिए रुझानों और एसेट की कीमतों का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है। सफलता की कुंजी बाज़ार की चाल पर तुरंत प्रतिक्रिया देना है।

यह तरीका काफ़ी सरल है, लेकिन इसके लिए अनुशासन ज़रूरी है। आप धैर्य से बैठकर इंतज़ार करते हैं, जब तक एसेट की कीमत चरम क्षेत्र के करीब न पहुँच जाए। फिर आप रिवर्सल क्षेत्र में बाज़ार में एंट्री करते हैं और अपनी चाल चलते हैं।

बिड-आस्क स्प्रेड क्या है?

वित्तीय बाज़ारों में बिड-आस्क स्प्रेड का मतलब किसी ट्रेडिंग इंस्ट्रूमेंट के बिड और आस्क प्राइस के बीच का अंतर है। आसान शब्दों में, यह खरीदार द्वारा दी जा रही सबसे ऊँची कीमत और उस एसेट के लिए विक्रेता द्वारा मांगी जा रही सबसे कम कीमत के बीच का अंतर है।

कम बिड-आस्क स्प्रेड वाली सिक्योरिटी की मांग आम तौर पर ज़्यादा होती है। हालांकि, इसमें कीमतों का अंतर भी अधिक हो सकता है।

शीर्ष ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म क्यों महत्वपूर्ण है

एक बेहतरीन ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म आपके साथ हो, तो तेज़ी से किए जाने वाले लेन-देन सुरक्षित रहते हैं। अग्रणी सेवा प्रदाता चुनने के लिए कई तरह के ट्रेडिंग इंस्ट्रूमेंट देते हैं। क्लाइंट्स को सिर्फ़ आम एसेट्स तक सीमित नहीं रहना पड़ता। वे पारंपरिक सिक्योरिटीज़, फ़ॉरेक्स और स्टॉक्स के अलावा एक्सोटिक करेंसी पेयर्स, अलग-अलग ETFs और टोकन भी आज़मा सकते हैं।

इससे भी अहम बात यह है कि एक बेहतरीन ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म सभी ज़रूरी टूल एक ही जगह उपलब्ध कराता है। इनमें इंडिकेटर, MT4 ट्रेडिंग टर्मिनल, समाचार और विश्लेषण, शैक्षिक संसाधन, मोबाइल ट्रेडिंग के विकल्प और कॉपी ट्रेडिंग जैसे अतिरिक्त प्रोडक्ट शामिल हैं, जो पहले से उपलब्ध होते हैं।

ट्रेडिंग का उदाहरण

मान लीजिए, आप $19 की कीमत वाला एक शेयर खरीदना चाहते हैं (बिड प्राइस)। उसी समय, एक विक्रेता उसी शेयर के लिए $20 मांग रहा है (आस्क प्राइस)। यहां बिड-आस्क स्प्रेड $1 है। कभी-कभी इसे प्रतिशत के रूप में भी दिखाया जा सकता है।

अगर खरीदार संबंधित एसेट को अधिक कीमत पर खरीदने के लिए तैयार हो जाता है, तो स्प्रेड बंद हो जाएगा। विक्रेता के कम कीमत पर एसेट बेचने के लिए तैयार होने पर भी ऐसा ही होता है।

उपलब्ध बाज़ारों के बारे में जानकारी लें

अपने सारे अंडे एक ही टोकरी में न रखें। यह पुरानी कहावत आज भी सही मायने रखती है। इसका मतलब है कि आपको खुद को एक ही एसेट तक सीमित नहीं रखना चाहिए। अलग-अलग वित्तीय बाज़ारों को तलाशें और अपने पोर्टफ़ोलियो में ज़्यादा से ज़्यादा विविधता बनाए रखें। अनुभवी ट्रेडर्स अपने पोर्टफ़ोलियो में जोड़ने से पहले हर नई सिक्योरिटी की अच्छी तरह जांच करते हैं।

यह तरीका आपको लगातार बदलते बाज़ारों में अधिक लचीलापन देगा। अगर आपकी कुछ रणनीतियाँ काम न करें, तो दूसरी रणनीति से उबरने और अच्छा मुनाफ़ा कमाने के लिए आपके पास हमेशा पर्याप्त विकल्प रहेंगे।

ट्रेडिंग के जोखिमों को जानें और उन्हें मैनेज करना सीखें

बेहतरीन ट्रेडिंग रणनीति होने पर भी कोई 100% सफलता की गारंटी नहीं दे सकता। हर ट्रेडर को कभी न कभी नुकसान होता है, चाहे वह कितना भी अनुभवी या प्रतिभाशाली क्यों न हो। किसी दिन आपके साथ भी ऐसा होगा। आपको बस इसके लिए अच्छी तरह तैयार रहना है। नुकसान ट्रेडिंग का हिस्सा है।

हालांकि, जोखिमों और उन्हें मैनेज करने के तरीकों को जानने से आप बड़ी नाकामियों से बच सकते हैं।

ट्रेडिंग के जोखिम क्या हैं?

हर ट्रेडर को ट्रेडिंग से जुड़े इन जोखिमों की जानकारी होनी चाहिए:

  • मार्जिन के जोखिम – कीमतों में मामूली उतार-चढ़ाव से भी मार्जिन कॉल आ सकता है, जिसका अनुभव आप बिल्कुल नहीं करना चाहेंगे। इसलिए, शुरुआती ट्रेडर्स को लीवरेज का बहुत आक्रामक तरीके से इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
  • ब्याज दर से जुड़े जोखिम – यदि ब्याज दर बढ़ती है, तो मुद्रा मजबूत होती है और इसके विपरीत भी। इससे विनिमय दरों में भी बड़े बदलाव हो सकते हैं।
  • लेन-देन संबंधी जोखिम – ट्रेडिंग चौबीसों घंटे हो सकती है, लेकिन समय का अंतर निवेशकों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। कुछ एसेट्स की कीमत अलग-अलग समय पर अलग हो सकती है।

इसके अलावा, ज़्यादातर नए ट्रेडर्स को अपने फ़ंड का प्रबंधन करना नहीं आता। यही वजह है कि 90% से ज़्यादा शुरुआती ट्रेडर्स असफल हो जाते हैं।

रिस्क मैनेजमेंट टूल

यूज़र्स को जोखिम प्रबंधन की कई रणनीतियां मिल सकती हैं। ये रणनीतियां संबंधित एसेट से जुड़ी होती हैं। हालांकि, चुने गए वित्तीय बाज़ार की परवाह किए बिना कुछ बुनियादी सुझाव मददगार होते हैं।

हमेशा स्टॉप-लॉस ऑर्डर का सही तरीके से इस्तेमाल करें। विशेषज्ञ स्टॉप-लॉस ऑर्डर लगाने के लिए सबसे सही जगह का पता लगाने हेतु टेक्निकल एनालिसिस, इंडिकेटर्स और चार्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। कुछ गड़बड़ होने पर बड़े नुकसान से बचने के लिए रोज़ाना नुकसान की सीमा तय करना भी अच्छा रहता है।

अपने जोखिम को एकसमान स्तर पर रखना और भावनाओं पर काबू रखना बेहद ज़रूरी है। सफलता की कुंजी है जोखिम/एक्सपोज़र को पहले से पहचानना और अपने पोर्टफ़ोलियो में विविधता बनाए रखना।

नए ट्रेडरों के लिए कॉपी ट्रेडिंग का विकल्प देखना अच्छा विचार है। इससे उन्हें बिना किसी पिछले अनुभव के बाज़ार में आने का अवसर मिलता है। क्लाइंट्स को किसी अनुभवी पेशेवर के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि वे वास्तविक समय में उसके ट्रेडों की नकल कर सकें और हर सफल ट्रेड से मुनाफ़ा साझा कर सकें।