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शुरुआती लोगों के लिए 1-मिनट स्कैल्पिंग रणनीति की जानकारी

हर स्तर के ट्रेडर वित्तीय बाज़ार में अपने अनुभव को बेहतर बनाने के लिए लगातार नई और असरदार स्ट्रैटेजी खोजते रहते हैं। चुनने के लिए कई तरह के टूल उपलब्ध हैं, लेकिन कुछ ट्रेडिंग स्टाइल अलग-अलग तरीकों और यूज़र्स की ज़रूरतों के लिए उतने लचीले नहीं होते। 1 मिनट की स्कैल्पिंग स्ट्रैटेजी ऐसी ही एक तकनीक है। इसका फ़ायदा सिर्फ़ स्कैल्पर्स को होगा। यह ट्रेडिंग के दूसरे तरीकों में काम नहीं करेगी।

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1 मिनट की Forex ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी अपनाने के लिए, हम मानते हैं कि आप पहले से जानते हैं कि स्कैल्पिंग क्या है। इस लेख में हम अलग-अलग स्ट्रैटेजी के साथ उन टिप्स पर ध्यान देंगे, जिनकी मदद से आप बेहतर बाय और सेल पोज़िशन तय कर सकते हैं और स्टॉप लॉस लगा सकते हैं। साथ ही, हम 1 मिनट की Forex स्ट्रैटेजी के सभी फ़ायदों और नुकसानों की तुलना करेंगे।

स्कैल्पिंग कैसे काम करती है

हम स्कैल्पिंग की बुनियादी बातें नहीं समझाएंगे। इनके बारे में आप यहाँऔर जान सकते हैं। आपको यह समझना होगा कि ट्रेडिंग की यह शैली कैसे काम करती है। वरना आप 1 मिनट की स्कैल्पिंग रणनीति को सही तरीके से लागू नहीं कर पाएंगे।

स्कैल्पिंग में करेंसी पेयर्स को खरीदना और बेचना शामिल है। इसमें एसेट को थोड़े समय के लिए होल्ड करके बेचने और अधिकतम मुनाफ़ा कमाने की कोशिश की जाती है। दूसरे शब्दों में, ट्रेडर बाज़ार के उतार-चढ़ाव से छोटे लाभ (5-10 पिप) कमाने की कोशिश करते हैं—हर ट्रेड में। ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने के लिए ट्रेडर आमतौर पर पोज़िशन साइज़ बढ़ाते हैं।

स्कैल्पिंग की कुछ प्रमुख विशेषताएँ:

  • कम एक्सपोज़र से जोखिम सीमित रहता है, क्योंकि प्रतिकूल घटना का सामना करने की संभावना काफी कम होती है और एक्सपोज़र बहुत कम समय के लिए रहता है।
  • छोटे मूव्स से ज़्यादा लचीलापन मिलता है, क्योंकि ट्रेडर के लिए इन्हें हासिल करना आसान होता है। यह कहना मुश्किल होगा कि किसी एसेट के लिए $1 का मूव करना, $0.1 का मूव करने से आसान है।
  • ज़्यादा फ़्रीक्वेंसी। बड़े मूव्स की तुलना में छोटे मूव्स ज़्यादा बार होते हैं, जिससे ट्रेडर को उनका फायदा उठाने के अधिक मौके मिलते हैं।
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अब जब आप स्कैल्पिंग के मुख्य पहलुओं को समझ गए हैं, तो आइए 1 मिनट की ट्रेडिंग रणनीति के कुछ लोकप्रिय रूपों पर नज़र डालें। हम 2 प्रमुख विकल्पों की समीक्षा करेंगे, जिन्हें आप स्कैल्पर के तौर पर इस्तेमाल करना चाह सकते हैं।

1 मिनट की ट्रेडिंग रणनीति #1

हम एक आसान 1 मिनट की Forex ट्रेडिंग रणनीति से शुरुआत करेंगे, जो शुरुआती ट्रेडर्स के लिए भी उपयुक्त है। इसे इस्तेमाल करना आसान है और सही तरीके से लागू करने पर यह काफ़ी मुनाफ़ेदार साबित हो सकती है। ट्रेडर्स को इन चीज़ों की ज़रूरत होगी:

  1. ट्रेंड में चल रहा एसेट। यह संभवतः प्रमुख करेंसी पेयर्स में से एक होगा।
  2. टाइम पीरियड। सुनिश्चित करें कि आपका ट्रेडिंग चार्ट 1 मिनट पर सेट हो।
  3. टेक्निकल इंडिकेटर्स। आपको 50 EMA/100 EMA और एक Stochastic oscillator की ज़रूरत होगी।
  4. ट्रेडिंग सेशन। लंदन या न्यूयॉर्क जैसे सबसे ज़्यादा वोलैटिलिटी वाले वित्तीय बाज़ारों में ट्रेड करें।

लॉन्ग ट्रेड में एंट्री

अगर आप लॉन्ग पोज़िशन लेना चाहते हैं, तो आपकी स्कैल्पिंग रणनीति को कुछ बुनियादी शर्तें पूरी करनी होंगी। सबसे पहले, 50 EMA के 100 EMA को ऊपर की ओर पार करने तक इंतज़ार करें। फिर, कीमत के EMA पर वापस आने तक इंतज़ार करें। आख़िर में, देखें कि Stochastic इंडिकेटर 20 के स्तर से ऊपर जाता है या नहीं। अगर ये सभी शर्तें पूरी होती हैं, तो ट्रेडर बाज़ार में बाय या लॉन्ग पोज़िशन ले सकते हैं।

शॉर्ट ट्रेड में एंट्री

यह लगभग लॉन्ग पोज़िशन जैसा ही है। फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि 50 EMA, 100 EMA से नीचे होना चाहिए और oscillator का स्तर 80 से नीचे जाना चाहिए। इसके बाद आप शॉर्ट पोज़िशन खोल सकते हैं या सेल ऑर्डर दे सकते हैं।

जोखिम प्रबंधन

1 मिनट की ट्रेडिंग रणनीति का इस्तेमाल करते समय जोखिमों को मैनेज करने के लिए आप ये कदम उठा सकते हैं:

  • हाल के स्विंग हाई या लो से लगभग 2-3 पिप ऊपर या नीचे स्टॉप लॉस सेट करें।
  • शुरुआती एंट्री पॉइंट से 8 से 12 पिप दूर टेक प्रॉफ़िट सेट करें।

1 मिनट की ट्रेडिंग रणनीति #2

दूसरी रणनीति का पालन करना और भी आसान लग सकता है। इसके लिए भी आपको इन चीज़ों की ज़रूरत होगी:

  1. बढ़ी हुई वोलैटिलिटी वाला ट्रेंडिंग एसेट (उदाहरण के लिए, EUR/USD)।
  2. अवधि। इस रणनीति के लिए, ट्रेडिंग चार्ट को 30 मिनट के टाइमफ़्रेम पर सेट करें।
  3. टेक्निकल इंडिकेटर। दूसरी रणनीति के लिए बोलिंगर बैंड बिल्कुल सही रहेंगे।
  4. ट्रेडिंग सेशन। लंदन या न्यूयॉर्क जैसे सबसे ज़्यादा वोलैटिलिटी वाले वित्तीय बाज़ारों में ट्रेड करें।

इस रणनीति का मुख्य फ़ायदा यह है कि यह लॉन्ग या शॉर्ट पोज़िशन लेने पर एक ही तरह से काम करती है। इससे इसे इस्तेमाल करना आसान हो जाता है और यह शुरुआती ट्रेडर्स के लिए ज़्यादा लचीली भी है। इसलिए, मुनाफ़ा कमाने के लिए आपको:

  • बाज़ार का ट्रेंड पहचानने के लिए 30 मिनट का टाइमफ़्रेम इस्तेमाल करें।
  • अगर कीमत निचले बोलिंगर बैंड तक पहुँचती है, तो इसका मतलब है कि कीमत अपट्रेंड में है और आप बाय पोज़िशन ले सकते हैं।
  • कीमत के ऊपरी बोलिंगर बैंड तक पहुँचने पर डाउनट्रेंड बनने के लिए सेल पोज़िशन सेट करें।

निष्कर्ष

1 मिनट की ट्रेडिंग रणनीति एक उपयोगी टूल हो सकती है। हालांकि, इसके लिए सही बैकटेस्टिंग ज़रूरी है, खासकर उन नए स्कैल्पर्स के लिए जो फ़ंड खोने का जोखिम कम करना चाहते हैं। इसके अलावा, इस रणनीति में लगातार नुकसान होने का जोखिम ज़्यादा है। वहीं, जोखिम कम रहता है, क्योंकि आपका हर ट्रेड केवल थोड़े समय के लिए खुला रहता है। साथ ही, ट्रेडर्स को मुनाफ़े की संभावना वाली एंट्री के ज़्यादा विकल्प मिल सकते हैं।

इस सामग्री में निवेश संबंधी सलाह, निवेश संबंधी सिफ़ारिशें, वित्तीय साधनों में किसी भी लेन-देन का प्रस्ताव या आग्रह शामिल नहीं है और इसे ऐसा नहीं समझा जाना चाहिए। कोई भी निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले, जोखिमों को समझने के लिए स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।