ट्रेड में एंट्री करने के कई अलग-अलग तरीक़े हैं, इसलिए ट्रेडिंग के लिए एंट्री पॉइंट चुनने का कोई एक सही या ग़लत तरीका तय करना संभव नहीं है। सबसे अहम मुनाफ़ा है। इसलिए, संभावित नुकसान कम करने के लिए आपको सबसे मुनाफ़ेदार और सुरक्षित एंट्री पोज़िशन चुननी चाहिए।

मक़सद है कि आपकी एंट्री सिर्फ़ सुरक्षित ही नहीं, बल्कि प्रभावी भी हो। इसी वजह से अनुभवी ट्रेडर्स ट्रेंड और कीमत की चाल के अनुसार फ़ॉरेक्स में एंट्री पॉइंट की अलग-अलग रणनीतियाँ अपनाते हैं। ये रणनीतियाँ सपोर्ट और रेज़िस्टेंस जैसे सिद्धांतों पर आधारित होती हैं। इसके अलावा, आपको ऐसे टेक्निकल इंडिकेटर्स पर भी विचार करना होगा जो तय किए गए सपोर्ट और रेज़िस्टेंस लेवल की पुष्टि करने में मदद करें।
लेकिन सबसे पहले, आपको ट्रेडिंग की बुनियादी बातें अच्छी तरह समझनी होंगी, जो यह तय करती हैं कि आपको ट्रेड में कब एंट्री करनी चाहिए।
ट्रेडिंग में एंट्री पॉइंट समग्र सफलता में अहम भूमिका निभाते हैं। एक ओर, आपको इनके पीछे ज़रूरत से ज़्यादा नहीं पड़ना चाहिए। दूसरी ओर, सही एंट्री पॉइंट चुनने से आपको बड़े संभावित नुकसान से बचने में मदद मिलेगी।
सबसे पहले यह जानें कि क्या आप बुनियादी बातों को सही तरह समझते हैं। यहां हमारा मतलब कीमत में बदलाव को प्रभावित करने वाले कारणों से है। कीमत की चाल पर किन कारकों का सबसे ज़्यादा असर पड़ता है? फ़ॉरेक्स के फ़ंडामेंटल एनालिसिस को ग़लत समझने से अनिवार्य रूप से मुश्किलें आएंगी और ट्रेडिंग के ग़लत फ़ैसले हो सकते हैं।
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इसलिए, ट्रेडिंग के लिए सुरक्षित एंट्री पॉइंट चुनने का पहला सबक है फ़ंडामेंटल एनालिसिस का सही इस्तेमाल करना। यह कीमत की संभावित दिशा का अनुमान लगाने में मददगार टूल है। साथ ही, इससे यह समझने में मदद मिलती है कि दिन के ट्रेडिंग के लिए सबसे अच्छा एंट्री पॉइंट तय करते समय कीमत की चाल शॉर्ट-टर्म या लॉन्ग-टर्म रणनीति के ज़्यादा अनुकूल होगी।
अगर आप फ़ंडामेंटल्स का इस्तेमाल करना जानते हैं, तो आपको एंट्री पॉइंट के कई तरीक़ों और तकनीकों का फ़ायदा मिलेगा। इनमें से ज़्यादातर के अच्छी तरह काम करने की संभावना है।
उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि आपको कीमत के कुछ खास लेवल तय करने हैं (जिन्हें सपोर्ट और रेज़िस्टेंस लेवल भी कहा जाता है), जिनसे बाज़ार में एक निश्चित प्रतिक्रिया हो सकती है। आप क्या करेंगे? संभवतः आप उस लेवल की पहचान करने के लिए टेक्निकल एनालिसिस का इस्तेमाल करेंगे, जो वास्तव में आपका ट्रेडिंग एंट्री पॉइंट है।
पिछले सपोर्ट और रेज़िस्टेंस लेवल से पता चलता है कि कीमत के फिर से इसी तरह चलने की काफ़ी संभावना है। इसके अलावा, बाज़ार की अपेक्षित प्रतिक्रिया होने की भी अच्छी संभावना है। इससे आप ट्रेड में एंट्री का सही तरीका चुन सकते हैं।
प्राइस चार्ट से प्राइस लेवल पहचानना बहुत आसान हो जाता है। आपको बस उन्हें पढ़ना सीखना है। ये ज़रूरी समयावधि में अहम जानकारी देते हैं। इससे, उदाहरण के लिए, करेंसी पेयर के दिशा बदलने का ज़्यादा सटीक पूर्वानुमान लगाने में मदद मिलती है।
प्राइस चार्ट सिर्फ़ सपोर्ट और रेज़िस्टेंस लेवल पहचानने में ही मदद नहीं कर सकते। ये ऐसे प्राइस लेवल पहचानने में भी काम आ सकते हैं जिनका अंत 50 या दो शून्यों से होता है:
जैसा कि आप देख सकते हैं, यहाँ प्राइस लेवल ज़्यादा स्पष्ट हैं और इनका फ़ाइनेंशियल मार्केट पर बड़ा मनोवैज्ञानिक असर हो सकता है। आम तौर पर, नए ट्रेडर स्पष्ट लेवल पर ट्रेड करना पसंद करते हैं, जबकि 1.1343 जैसा लेवल थोड़ा मुश्किल लग सकता है, खासकर शुरुआत में।
फ़ॉरेक्स में एंट्री पॉइंट तलाशते समय सिर्फ़ साइकोलॉजिकल लेवल पर ही ध्यान देना ज़रूरी नहीं है। दूसरे तरीके भी काफ़ी मददगार हो सकते हैं। टेक्निकल इंडिकेटर पर भी ज़रूर ध्यान दें, क्योंकि इन्हें बुनियादी प्राइस चार्ट पर दिखाया जा सकता है।
ट्रेडर कई तरह के इंडिकेटर में से चुन सकते हैं। लेकिन, आपको यह पता होना चाहिए कि उनका इस्तेमाल कैसे करना है। वरना, यह सिर्फ़ समय की बर्बादी होगी। इससे फ़ैसले लेने में देरी हो सकती है, जो ठीक नहीं है।
इसलिए, आपके सामने आने वाले सभी टेक्निकल इंडिकेटर एक साथ चुनें। फ़िबोनाची रिट्रेसमेंट और पिवट पॉइंट इंडिकेटर जैसे सबसे आज़माए हुए इंडिकेटर से शुरुआत करना बेहतर है। इनका मुख्य फ़ायदा यह है कि ये आम तौर पर चुने गए ट्रेडिंग इंस्ट्रूमेंट की कीमत के अनुरूप होते हैं।
इन इंडिकेटर का इस्तेमाल आप इस तरह कर सकते हैं:
यह प्रक्रिया एंट्री पॉइंट की पुष्टि करने और उसे जितना संभव हो सुरक्षित बनाने में मदद करती है।
ध्यान दें: कीमत को आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह देने हेतु, पुष्टि किए गए एंट्री पॉइंट और मौजूदा लेवल के बीच बड़ा अंतर रखें।
लगातार बेहतर ट्रेडिंग करने के लिए, आपको हर नए एंट्री पॉइंट की पुष्टि करनी होगी। साथ ही, आपको सही टाइमफ़्रेम पर ट्रेडिंग करने की आदत डालनी होगी। अनुमानित प्राइस मूवमेंट का पूरा फ़ायदा उठाने के लिए ऐसी सबसे अच्छी डे ट्रेडिंग रणनीति तय करें जो आपकी तकनीकों के मुताबिक हो।
इस रणनीति में कई संकेतों के मेल का इस्तेमाल किया जाता है। इससे स्टॉप लॉस को सही तरीके से लगाने में भी मदद मिलती है, जो खासकर शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स के लिए अच्छा काम करता है। ध्यान रखें कि प्राइस कुछ खास स्थितियों के अनुसार बदलती है। इसमें उतार-चढ़ाव यूँ ही नहीं होता। इसलिए, टाइट स्टॉप लॉस लगाने से जोखिम का दायरा कम होगा और एंट्री पॉइंट और सुरक्षित बनेगा।
इस सामग्री में निवेश संबंधी सलाह, निवेश संबंधी सिफ़ारिशें, वित्तीय साधनों में किसी भी लेन-देन का प्रस्ताव या आग्रह शामिल नहीं है और इसे ऐसा नहीं समझा जाना चाहिए। कोई भी निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले, जोखिमों को समझने के लिए स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।