
World Gold Council के शोध और अपडेट के अनुसार, पिछले वर्षों में केंद्रीय बैंकों की गोल्ड मांग रिकॉर्ड स्तर पर रही। जारी किए गए आंकड़े तेज़ी का एक मज़बूत रुझान दिखाते हैं। कई कारक अब भी गोल्ड बाज़ार में तेज़ी को समर्थन दे रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह रुझान 2023 में भी जारी रहेगा और दुनिया भर के केंद्रीय बैंक नेट खरीदार बने रहेंगे।
जैसा कि चीन के केंद्रीय बैंक की लगातार मांग से पता चलता है, वह इस समय सोने के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है। वैश्विक बाज़ार से $16 बिलियन मूल्य का 26 टन सोना बिक गया।
आधिकारिक बयान के अनुसार, बैंक ने जनवरी 2023 में ही 15 टन सोना खरीद लिया है।
देश लगातार तीसरे महीने बड़ी मात्रा में परिसंपत्तियां खरीद रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य चीन के गोल्ड रिज़र्व को बढ़ाना है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि अगले कुछ महीनों तक यह रुझान जारी रहेगा। जैसा कि हम जानते हैं, यह तेजी वाले बाजार की स्थितियों का मुख्य संकेतक है और ट्रेडर्स को लॉन्ग पोज़िशन लेने का संकेत देता है।



चीन से सोने की खरीदारी में आखिरी तेजी 2002 से 2019 के बीच देखी गई थी। इस 17 साल की अवधि में देश ने करीब 1,150 टन सोना जमा किया।
केंद्रीय बैंकों की इतनी बड़ी माँग के बावजूद, निवेश की माँग अब भी काफ़ी कम है। सोने की कीमत में 300 डॉलर की तेज़ी के बावजूद, जिसने पिछले दशक में साल की सबसे मज़बूत शुरुआतों में से एक दिखाई, ज़्यादातर निवेशक अब भी बाज़ार से दूर बने हुए हैं।
आर्थिक अनिश्चितता और ट्रेडर्स की चिंताएँ लगातार बढ़ रही हैं। इससे सोने में दिलचस्पी फिर बढ़ रही है। इसी वजह से अधिकांश अर्थशास्त्रियों का कहना है कि 2023 में इस एसेट की कीमत रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँच सकती है। बाज़ारों को मंदी की आशंकाओं को कम करके आँकने की उम्मीद है, जिसका मतलब है कि महँगाई के जोखिम बढ़ सकते हैं।
इसके अलावा, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि FED के पास महंगाई रोकने और उसे वादे के मुताबिक 2% तक लाने के उपाय हैं। आसान शब्दों में कहें तो, ठहराव, महंगाई या मंदी के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल बढ़ सकती है। इस वजह से सोना एक सुरक्षित विकल्प बना रह सकता है।
आपकी ट्रेडिंग किस्मत आपका साथ दे!