
लगातार 10 बार ब्याज दरें बढ़ाने के बाद फ़ेडरल रिज़र्व (Fed) द्वारा दरें न बढ़ाने की उम्मीद बुधवार की शुरुआत में बाज़ार की रफ्तार पर असर डाल रही है। खासकर तब, जब अमेरिकी महंगाई के आंकड़े कमजोर रहने के अनुमान के अनुरूप आए। फिर भी, फ़ेड के कुछ पूर्व प्रतिनिधियों ने जुलाई में ब्याज दरें बढ़ाए जाने को लेकर चिंता जताई और आशावादियों को सतर्क किया।
इससे बाजारों में साप्ताहिक उतार-चढ़ाव की कुछ भरपाई हुई। अमेरिकी डॉलर को स्पष्ट दिशा पाने में मुश्किल हो रही है, जबकि यील्ड कई दिनों के उच्च स्तर से पीछे हट रही हैं। वहीं, गोल्ड की कीमत में तीन दिनों की गिरावट का सिलसिला टूटा, लेकिन इसमें ज़्यादा रिकवरी नहीं हुई। तेल की मांग बढ़ने की उम्मीदों के बीच ब्रेंट ने पिछले दिन की बढ़त को आगे बढ़ाया।
G10 करेंसी पेयर्स में AUDUSD सबसे बड़ा गेनर बना, जबकि GBPUSD और EURUSD में गति नहीं रही और वे दिन की शुरुआत के स्तरों के आसपास बने रहे। इस दौरान Cable पेयर ने ब्रिटेन के मिले-जुले आँकड़ों को नज़रअंदाज़ किया, जबकि यूरो hawkish ECB की चिंताओं के बावजूद बढ़त हासिल करने में संघर्ष करता रहा। वहीं USDJPY, USDCAD और USDCHF में मामूली गिरावट दर्ज हुई, जबकि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शेयरों में मिला-जुला कारोबार हुआ।
दूसरी ओर, क्रिप्टोकरेंसी की रफ़्तार भी धीमी पड़ रही है, क्योंकि Fed से पहले की सतर्कता के साथ SEC और Binance के मामले को लेकर मिली-जुली भावनाएँ भी जुड़ गई हैं।
प्रमुख एसेट्स में हालिया उतार-चढ़ाव इस प्रकार हैं:



फेड के फैसले वाले दिन बाज़ार का निष्क्रिय रहना सामान्य है, लेकिन इस आशंका ने ट्रेडर्स को सतर्क रखा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक सबको चौंका सकता है। खासकर BoC और RBA के अप्रत्याशित हॉकिश रुख के बाद यह आशंका बढ़ी है। ध्यान देने वाली बात है कि मई में अमेरिका की महंगाई धीमी हुई, लेकिन कोर CPI के आंकड़े अपेक्षित कमजोरी के अनुरूप रहे, जबकि कुछ नीति-निर्माताओं ने अपने हालिया भाषणों में हॉकिश रुख अपनाया। इससे ट्रेडिंग जगत इस नतीजे पर पहुंचा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरें नहीं बढ़ाएगा। हालांकि, फेड को डविश रुख के लिए नहीं जाना जाता, खासकर तब जब इसकी संभावना कीमतों में पहले से ही काफी हद तक शामिल हो।
दूसरी ओर, UK GDP के मजबूत आंकड़ों के बावजूद Cable के खरीदारों ने राहत की सांस ली है, क्योंकि अन्य आर्थिक संकेतक सुस्ती से उबरने की रफ्तार धीमी होने का संकेत दे रहे हैं। इसके अलावा, बॉन्ड बाज़ार की सामने आती चुनौतियां और बाज़ार में आशावाद बढ़ाने में चीन की नाकामी भी सकारात्मक रुख रखने वालों के लिए चुनौती हैं।
इसलिए, आशावादियों के लिए आगे बढ़त बनाए रखना मुश्किल होगा, जब तक कि Fed का फैसला कोई खास असर न डाले—जिसकी संभावना बहुत कम है।
यूरोज़ोन का औद्योगिक उत्पादन, US PPI और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के अन्य कम महत्वपूर्ण आँकड़े ट्रेडर्स का ध्यान खींच सकते हैं, लेकिन मुख्य ध्यान इस बात पर रहेगा कि Fed महँगाई को काबू में रख पाता है या नहीं, और क्या वह डोविश रुख अपनाने से बचता है। इसके लिए FOMC ब्याज दरें अपरिवर्तित रख सकता है, लेकिन आर्थिक अनुमान बढ़ा सकता है और आगे दरें बढ़ाने के संकेत दे सकता है। इससे Fed चेयर पॉवेल की प्रेस कॉन्फ़्रेंस पर भी ध्यान जाएगा।
आपकी ट्रेडिंग किस्मत आपका साथ दे!