ट्रेड ट्रिगर ऐसी घटना है जो किसी अंतर्निहित एसेट के आधार पर ट्रेड शुरू करती है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से स्टॉक ट्रेडर्स करते हैं, लेकिन यह इंडेक्स या ऑप्शन में ट्रेड करने वालों के लिए भी बहुत उपयोगी हो सकता है। ट्रेड ट्रिगर कई प्रकार के हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, यह किसी एक स्टॉक के उतार-चढ़ाव को दर्शा सकता है। वहीं, यह पूरे बाज़ार की गतिविधि को भी दिखा सकता है, जब लक्षित इंडेक्स पहले से तय स्तर तक पहुँचते हैं या उसे पार कर जाते हैं।

इस लेख में, हम ट्रेड ट्रिगर के प्रमुख प्रकारों और उदाहरणों को समझाएँगे, ताकि यह देखा जा सके कि निवेशक इनके इस्तेमाल से कैसे फ़ायदा उठा सकते हैं। इसके अलावा, हम इस तरीके के प्रमुख फ़ायदों और नुकसानों की समीक्षा करेंगे, ताकि तय किया जा सके कि इसका इस्तेमाल करना उचित है या नहीं।
जैसा कि पहले बताया गया है, ट्रेड ट्रिगर एक ऐसी खास घटना है जो बाज़ार की कुछ स्थितियों और पहले से तय मानदंडों के पूरा होने पर घटित होती है। इसका इस्तेमाल किसी ऐसे ट्रेड (लेन-देन) को शुरू करने के लिए ऑटोमेशन टूल के रूप में किया जा सकता है, जिसमें किसी अतिरिक्त निर्देश या मैन्युअल हस्तक्षेप की ज़रूरत न हो।
आसान शब्दों में, ट्रेड ट्रिगर तब सक्रिय होता है जब बाज़ार में कुछ खास स्थितियाँ बनती हैं, जैसे किसी सिक्योरिटी या इंडेक्स की कीमत का गिरना या बढ़ना। इन स्थितियों के पूरा होने पर ट्रेड की एक श्रृंखला शुरू हो जाती है। निवेशक इस तरीके का इस्तेमाल कुछ खास प्रकार के ऑटोमेटेड ट्रेड सेट करने के लिए करते हैं। उदाहरण के लिए, कीमत एक निश्चित स्तर पर पहुँचने पर किसी एसेट को अपने आप बेचने या खरीदने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।



ध्यान देने योग्य मुख्य विशेषताएँ:
ट्रेड ट्रिगर के प्रकार के आधार पर, निवेशक इस तरीके से अपने आप सही मार्केट में एंट्री और एग्ज़िट पोज़िशन तय कर सकते हैं। अनुभवी ट्रेडर इस टूल का इस्तेमाल कंटिंजेंट ऑर्डर लगाने के लिए करते हैं। पहला ऑर्डर पूरा होने पर दूसरा ऑर्डर अपने आप शुरू हो जाता है। कुछ पहले से तय मार्केट स्थितियां पूरी होने तक यह सक्रिय रहता है।
ट्रेड ट्रिगर के उदाहरण: मान लीजिए, आप मौजूदा एसेट प्राइस के दोनों ओर OCO ऑर्डर लगाना चाहते हैं। ऑर्डर का एक हिस्सा पूरा होते ही दूसरा हिस्सा तुरंत अपने आप रद्द हो जाएगा। साथ ही, ट्रेडर को मोमेंटम की दिशा में मार्केट में एंट्री करने का अवसर भी मिलेगा।
ट्रेड ट्रिगर का प्रकार इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस एसेट में ट्रेड करते हैं। इसके अलावा, यह पूरी की जाने वाली शर्तों और मानदंडों पर भी निर्भर कर सकता है। ट्रेड ट्रिगर के कुछ सबसे लोकप्रिय प्रकार ये हैं:
एक ओर, ट्रेड ट्रिगर का इस्तेमाल ऑटोमेटेड ट्रेड पूरा करने या शुरू करने का एक बेहतरीन तरीका हो सकता है। लेकिन ट्रेडिंग की किसी भी दूसरी तकनीक की तरह, इस टूल का इस्तेमाल करते समय आपको बहुत सावधान रहना चाहिए। एक आम गलती है पहले से खुली पोज़िशन और ट्रेडिंग के विचारों को भूल जाना, जिससे अप्रत्याशित नुकसान हो सकता है।
पहले की पोज़िशन की समीक्षा करना अच्छा रहेगा। इसके अलावा, ट्रेड ट्रिगर का इस्तेमाल करते समय दिनभर के ऑर्डर पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। लंबी समय-सीमाओं में सफल ट्रेडिंग रणनीति सेट करना मुश्किल हो सकता है। सही तरीके से इस्तेमाल करने पर, यह तरीका पहले से तय शर्तों वाला ऑटोमेटेड ऑर्डर सिस्टम बनाने में मदद कर सकता है, जो लंबे समय तक उपयोगी रह सकता है।
इस सामग्री में निवेश संबंधी सलाह, निवेश संबंधी सिफ़ारिशें, वित्तीय साधनों में किसी भी लेन-देन का प्रस्ताव या आग्रह शामिल नहीं है और इसे ऐसा नहीं समझा जाना चाहिए। कोई भी निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले, जोखिमों को समझने के लिए स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।